सुबह पिता बांटते रहे अखबार : बेटा किताबों में लिखता रहा अपना भविष्य : संघर्ष और मेहनत के बीच पले अरशान को शासकीय मेडिकल कॉलेज मंदसौर में MBBS सीट मिली
अरशान बताते हैं कि पिता को रोज सुबह अंधेरे में उठकर मेहनत करते देख उनके मन में हमेशा एक ही बात रहती थी कि जब पिता परिवार के भविष्य के लिए इतनी मेहनत कर सकते हैं, तो उन्हें भी अपने सपने को पूरा करने के लिए पूरी ईमानदारी और मेहनत करनी चाहिए।
रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज़) सपने बड़े हों तो परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, मेहनत उन्हें हकीकत में बदलने का रास्ता जरूर दिखा देती है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है अरशान अली की, जिन्होंने संघर्ष और सीमित संसाधनों के बीच मेहनत करते हुए NEET-2026 में सफलता हासिल की है। अरशान को शासकीय मेडिकल कॉलेज मंदसौर (GMC Mandsaur) में MBBS की सीट मिली है।
अरशान की सफलता के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता हैदर अली का संघर्ष रहा। हैदर अली रोज सुबह करीब 5 बजे उठते हैं और रेलवे स्टेशन पहुंचकर अखबारों का बंडल लेकर घर-घर अखबार बांटने निकल जाते हैं। परिवार के भविष्य के लिए वर्षों से जारी पिता की यह मेहनत अरशान ने बेहद करीब से देखी और इसी संघर्ष को उन्होंने अपनी ताकत बना लिया।
अरशान बताते हैं कि पिता को रोज सुबह अंधेरे में उठकर मेहनत करते देख उनके मन में हमेशा एक ही बात रहती थी कि जब पिता परिवार के भविष्य के लिए इतनी मेहनत कर सकते हैं, तो उन्हें भी अपने सपने को पूरा करने के लिए पूरी ईमानदारी और मेहनत करनी चाहिए। यही सोच धीरे-धीरे उनके डॉक्टर बनने के लक्ष्य की मजबूत नींव बन गई।
NEET की तैयारी के दौरान अरशान ने नियमित पढ़ाई और लगातार अभ्यास पर फोकस रखा। अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट की टीम ने भी उन्हें मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास के माध्यम से तैयारी की दिशा दी। शिक्षकों के मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता के बल पर अरशान ने NEET-2026 में सफलता हासिल की।
अब अरशान मंदसौर के शासकीय मेडिकल कॉलेज में MBBS की पढ़ाई करेंगे। उनकी सफलता ने परिवार में खुशी का माहौल पैदा कर दिया है और सबसे ज्यादा गर्व उस पिता को है, जिसने वर्षों तक अखबारों के बंडल उठाकर परिवार के सपनों को सींचा।
अरशान का मानना है कि कोई भी सपना असंभव नहीं होता। सही मार्गदर्शन, जुनून और लगातार मेहनत के साथ लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनके लिए पिता की मेहनत हमेशा सबसे बड़ी प्रेरणा रही है।
एक तरफ पिता रोज सुबह अखबार लेकर लोगों के घरों तक पहुंचते रहे और दूसरी तरफ बेटा किताबों के साथ अपने डॉक्टर बनने के सपने की ओर बढ़ता रहा। आज अरशान की सफलता ने हैदर अली के वर्षों के संघर्ष को एक ऐसी उपलब्धि में बदल दिया है, जिस पर पूरा परिवार गर्व कर सकता है।
अरशान की कहानी सिर्फ NEET में सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उस मेहनत और हौसले की कहानी है, जो कठिन परिस्थितियों के बीच भी सपनों को जिंदा रखता है।
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