विपरीत परिस्थितियों को बनाया अवसर : रतलाम के पुष्कर ने Re-NEET में बढ़ाए 14 अंक
अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने बताया कि 3 मई को आयोजित पहली NEET परीक्षा में पुष्कर ने 550 अंक हासिल किए थे। उस समय मेडिकल कॉलेज मिलने की संभावना तो थी, लेकिन परीक्षा निरस्त होने और Re-NEET की घोषणा के बाद अधिकांश विद्यार्थी मानसिक तनाव और भविष्य की अनिश्चितता से जूझने लगे।
रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज़) सफलता उन्हीं के कदम चूमती है जो मुश्किल हालात में भी अपने लक्ष्य से नहीं डिगते। रतलाम के राजीव नगर निवासी पुष्कर कनौजिया ने इसे सच कर दिखाया है। अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के छात्र पुष्कर ने Re-NEET 2026 को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में स्वीकार किया और अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार करते हुए एमबीबीएस में प्रवेश लगभग सुनिश्चित कर लिया।
अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमावत ने बताया कि 3 मई को आयोजित पहली NEET परीक्षा में पुष्कर ने 550 अंक हासिल किए थे। उस समय मेडिकल कॉलेज मिलने की संभावना तो थी, लेकिन परीक्षा निरस्त होने और Re-NEET की घोषणा के बाद अधिकांश विद्यार्थी मानसिक तनाव और भविष्य की अनिश्चितता से जूझने लगे।
उन्होंने बताया कि Re-NEET की घोषणा के बाद संस्थान की पूरी टीम ने विद्यार्थियों की विशेष काउंसलिंग की, उनका मनोबल बढ़ाया और नई रणनीति के साथ दोबारा तैयारी करवाई। इसी मार्गदर्शन और लगातार अभ्यास का परिणाम रहा कि पुष्कर ने दूसरी परीक्षा में 564 अंक प्राप्त किए। उन्होंने अपने स्कोर में 14 अंकों की बढ़ोतरी करते हुए रैंक में भी उल्लेखनीय सुधार किया, जिससे अब उनका एमबीबीएस में प्रवेश सुनिश्चित हो गया है।
पुष्कर ने बताया कि Re-NEET की खबर सुनकर वे भी शुरुआत में निराश हो गए थे। उन्हें लगा कि दोबारा परीक्षा में पहले जैसा प्रदर्शन कर पाएंगे या नहीं। लेकिन अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट के शिक्षकों और पूरी टीम ने हर कदम पर उनका आत्मविश्वास बनाए रखा। नियमित अभ्यास, सही मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच ने उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों का चयन सीमा रेखा (Borderline) पर था, उनके लिए Re-NEET किसी वरदान से कम नहीं था। जो विद्यार्थी इस अवसर का सही उपयोग कर सके, उन्हें सफलता मिली। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से संदेश दिया कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, क्योंकि हर चुनौती अपने साथ एक नया अवसर लेकर आती है।
पुष्कर ने बताया कि वे एक साधारण परिवार से हैं। उनके पिता जितेंद्र कनौजिया एक छोटा-सा गैराज संचालित करते हैं और कड़ी मेहनत से परिवार का पालन-पोषण करते हैं। अब पुष्कर अपने परिवार के पहले डॉक्टर बनने की ओर अग्रसर हैं। उनकी सफलता न केवल उनके माता-पिता के सपनों को साकार करने वाली है, बल्कि उन हजारों विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लक्ष्य को पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पुष्कर की इस उपलब्धि पर अभ्यास करियर इंस्टीट्यूट परिवार ने उनका और उनके परिजनों का मिठाई खिलाकर सम्मान किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
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