रतलाम निगम बजट सम्मेलन में हंगामा: सावरकर टिप्पणी पर टकराव, पुतला दहन और चूड़ियों की राजनीति
विपक्ष का धरना, सत्ता-विपक्ष आमने-सामने : हंगामे के कारण जनमुद्दों पर चर्चा अधूरी
रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज़) नगर निगम का साधारण बजट सम्मेलन मंगलवार सुबह 11 बजे अध्यक्ष मनीषा शर्मा की अध्यक्षता में शुरू हुआ, लेकिन शुरुआत से ही सदन में तीखा विरोध देखने को मिला। विपक्षी पार्षदों ने सिर पर काली पट्टी बांधकर ‘रतलाम नगर सरकार का 4 साल का सच’ लिखे बैनर के साथ आसंदी के सामने धरना दे दिया और जनमुद्दों की अनदेखी व अधिकारियों की उदासीनता का आरोप लगाते हुए महापौर प्रहलाद पटेल के खिलाफ नारेबाजी की।
करीब 30 मिनट के हंगामे के बाद जैसे-तैसे प्रश्नकाल शुरू हुआ। भाजपा पार्षद परमानंद योगी ने अपने वार्ड में बिना सूचना कराए जा रहे सीवरेज कार्यों पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को फटकार लगाई और कहा कि पार्षदों को दरकिनार कर मनमानी की जा रही है।
नामांतरण में देरी पर घिरी व्यवस्था
नामांतरण के मामलों में देरी को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों ने अधिकारियों पर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष शांतिलाल वर्मा ने कहा कि लोग लगातार चक्कर काट रहे हैं, जिससे जनप्रतिनिधियों की साख प्रभावित हो रही है। भाजपा पार्षदों ने भी कार्यप्रणाली पर असहमति जताई।
पार्षद रत्नसिंह राठौर के सवाल पर संबंधित अधिकारी के देर से पहुंचने और शहर में लगाए गए पौधों की जीवित संख्या का जवाब न दे पाने पर भी सदन में नाराजगी दिखी और कार्रवाई की मांग उठी।
कांग्रेस नेताओं और सावरकर पर टिप्पणी से बढ़ा विवाद
सम्मेलन के दौरान भाजपा पार्षद धर्मेंद्र व्यास द्वारा कांग्रेस नेताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद माहौल गरमा गया। वहीं कांग्रेस पार्षद मोहम्मद सलीम बागबान ने अपने वक्तव्य में वीर सावरकर को लेकर विवादित टिप्पणी कर दी। इस पर भाजपा और कांग्रेस पार्षद आमने-सामने आ गए और माफी की मांग को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। हंगामा इतना बढ़ा कि दोनों पक्ष आसंदी तक पहुंच गए, जिससे करीब आधे घंटे तक कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
पुतला दहन और विरोध प्रदर्शन
विवाद के बाद महापौर प्रहलाद पटेल सहित भाजपा पार्षद नारेबाजी करते हुए निगम भवन से बाहर निकले और कांग्रेस पार्षद मोहम्मद सलीम बागबान का पुतला दहन किया। पुतले पर नेता प्रतिपक्ष शांतिलाल वर्मा और पार्षद यास्मीन शैरानी के नाम भी लिखे गए। इसके जवाब में कांग्रेस पार्षदों ने महापौर का पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया।
चूड़ियों से विरोध, सदन में और बढ़ा तनाव
हंगामा यहीं नहीं थमा। भाजपा महिला पार्षदों ने कांग्रेस पार्षदों को चूड़ियां भेंट कर विरोध जताया, जबकि कांग्रेस पार्षदों ने वीर सावरकर से जुड़े दस्तावेज सदन में उछाल दिए। इसी बीच महिला कांग्रेस पार्षद महापौर को चूड़ियां देने पहुंचीं, जिन्हें महापौर ने हाथ में लेकर फेंक दिया। इसके बाद एक बार फिर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
लगातार हंगामे और टकराव के चलते शहर के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी, जिससे सम्मेलन का मूल उद्देश्य अधूरा रह गया।
What's Your Reaction?

