पेड़ हटाने के दौरान विवाद: नगर परिषद अध्यक्ष व कर्मचारी ने पार्षद पति पर लगाए अभद्रता,मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा के आरोप : एफआईआर दर्ज करने की मांग
जानकारी के अनुसार, नीम का पेड़ गिरने के बाद नगर परिषद के कर्मचारियों के साथ मिलकर दबे हुए लोगों को निकालने और रास्ता साफ करने का कार्य किया जा रहा था। अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला का आरोप है कि इसी दौरान प्रशांत मांडोत मौके पर पहुंचे और उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी।
सैलाना (रतलाम) नगर के महात्मा गांधी मार्ग स्थित बस स्टैंड के समीप नीम का पेड़ गिरने के बाद चल रहे राहत एवं बचाव कार्य के दौरान विवाद खड़ा हो गया। नगर परिषद अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला ने पार्षद पति प्रशांत मांडोत पर अभद्रता, गाली-गलौज, मारपीट तथा शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। इस संबंध में शुक्ला ने सैलाना थाने में लिखित आवेदन देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, नीम का पेड़ गिरने के बाद नगर परिषद के कर्मचारियों के साथ मिलकर दबे हुए लोगों को निकालने और रास्ता साफ करने का कार्य किया जा रहा था। अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला का आरोप है कि इसी दौरान प्रशांत मांडोत मौके पर पहुंचे और उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने मारपीट कर शासकीय कार्य को बाधित किया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
इसी मामले में नगर परिषद कर्मचारी महेश गोसर ने भी पुलिस को अलग से शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि वह अन्य कर्मचारियों के साथ पेड़ हटाने और राहत कार्य में लगे हुए थे, तभी प्रशांत मांडोत ने उनके साथ अभद्रता की तथा मारपीट शुरू कर दी। इससे नगर परिषद का कार्य प्रभावित हुआ और शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न हुआ।
नगर परिषद अध्यक्ष और कर्मचारी दोनों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस ने शिकायतें प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में
उल्लेखनीय है कि पार्षद पति प्रशांत मांडोत और पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष के पति जीतेन्द्रसिंह राठौर ने वर्तमान नगर परिषद अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय ने निरस्त कर दिया था। इसके बाद जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष हर्ष विजय गहलोत द्वारा पार्षद सलोनी माण्डोत और दोनों कांग्रेस नेताओं को छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित किए जाने की कार्रवाई भी की गई थी। ऐसे में ताजा विवाद को लेकर नगर की राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
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