थर्ड जेंडर को मिला अधिकार, लेकिन नहीं मिली दो गज ज़मीन : रतलाम में किन्नर समाज की गुरु को समाधि देने तक नहीं मिली जगह, न आधार कार्ड न शासकीय सुविधाएं

शहर में सामने आए ताज़ा मामले ने इस सच्चाई को उजागर कर दिया है। रतलाम में किन्नर समाज की गुरु प्रेम कुंवर जागीरदार के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं मिल सकी। जब शव को शहर से लगे शिवपुर गांव ले जाया गया तो ग्रामीणों ने विरोध कर दिया

Oct 13, 2025 - 11:56
Oct 13, 2025 - 18:14
 0
थर्ड जेंडर को मिला अधिकार, लेकिन नहीं मिली दो गज ज़मीन : रतलाम में किन्नर समाज की गुरु को समाधि देने तक नहीं मिली जगह, न आधार कार्ड न शासकीय सुविधाएं

रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज) सर्वोच्च न्यायालय और भारत सरकार ने जिन लोगों को “थर्ड जेंडर” का संवैधानिक अधिकार दिया, वे आज भी जीवन और मृत्यु दोनों ही स्थितियों में उपेक्षा का शिकार हैं। रतलाम में किन्नर समाज को न तो जीने के लिए आधार मिला है और न ही मृत्यु के बाद दो गज ज़मीन।

शहर में सामने आए ताज़ा मामले ने इस सच्चाई को उजागर कर दिया है। रतलाम में किन्नर समाज की गुरु प्रेम कुंवर जागीरदार के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं मिल सकी। जब शव को शहर से लगे शिवपुर गांव ले जाया गया तो ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। आखिरकार बड़ी मशक्कत के बाद उन्हें श्मशान के रास्ते में नाले के किनारे दफनाने की अनुमति मिली। लगातार बारिश के कारण अब वह जगह कीचड़ से भर चुकी है।

थर्ड जेंडर का दर्जा मिला, सुविधाएं शून्य

किन्नर समाज की सदस्य काजल बताती हैं कि “सरकार ने हमें थर्ड जेंडर का अधिकार तो दे दिया, लेकिन समाज और सिस्टम की सोच अब भी नहीं बदली। हमारे पास न आधार कार्ड है, न राशन कार्ड, न वोट देने का अधिकार। जीते जी संघर्ष करते हैं और मरने के बाद भी सम्मान नहीं मिलता।”

काजल बताती हैं कि उनके गुरु की समाधि के लिए भी प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली।

ना घर, ना योजना, ना पहचान

रतलाम के ऊकाला रोड की एक अवैध कॉलोनी में काजल और उनके साथ करीब 15 किन्नर 650 वर्गफीट के छोटे कमरे में रहते हैं। इनके पास न पारिवारिक आईडी है, न राशन कार्ड। पुराने पहचान पत्रों में उनका नाम और लिंग बदलाव से पहले का दर्ज है।

वहीं, अप्सरा किन्नर बताती हैं कि “मैं शिक्षित हूं, लेकिन सरकारी योजनाओं और नौकरियों में हमारे लिए कोई स्पष्ट वर्ग नहीं है। कई पोर्टल्स पर आज भी ‘थर्ड जेंडर’ का विकल्प मौजूद ही नहीं है।”

कब मिला थर्ड जेंडर का अधिकार

साल 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्णय देते हुए ट्रांसजेंडर समुदाय को थर्ड जेंडर के रूप में संवैधानिक मान्यता दी थी। इसके बाद 2019 में संसद से पारित और राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) एक्ट लागू हुआ, जिसके तहत उन्हें कानूनी पहचान और अधिकार प्राप्त हुए।

प्रशासन को नहीं जानकारी

जब इस विषय में नगर निगम आयुक्त अनिल भाना से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। यदि अंतिम संस्कार के लिए जगह उपलब्ध नहीं है तो वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कार्यवाही की जाएगी।”

प्रश्न अब भी वही – अधिकार या औपचारिकता?

थर्ड जेंडर को कानूनी पहचान मिले एक दशक बीत चुका है, लेकिन रतलाम जैसे शहरों में यह समुदाय आज भी सम्मान और मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। सवाल अब भी वही है —

क्या हमारा समाज और सरकार इन लोगों को वास्तव में उनका हक़ और सम्मान दिला पाएगी, या फिर संवैधानिक अधिकार सिर्फ एक दस्तावेज़ तक सीमित रह जाएंगे?

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Sujeet Upadhyay Sujeet Upadhyay is a senior journalist who have been working for around Three decades now. He has worked in More than half dozen recognized and celebrated News Papers in Madhya Pradesh. His Father Late shri Prakash Upadhyay was one of the pioneer's in the field of journalism especially in Malwanchal and MP.