कोरोना काल के बाद गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों पर हिम्मत कोठारी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र : आयुष्मान योजना के विस्तार और दवाइयों पर मूल्य नियंत्रण की मांग
कोठारी ने अपने पत्र में कहा कि कोरोना महामारी के बाद देशभर में हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखने को मिल रही है। इसके अलावा मधुमेह, उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और थायराइड जैसी बीमारियों से प्रभावित लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज़) मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कोरोना काल के बाद देशभर में हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज, कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इन बीमारियों के कारणों की वैज्ञानिक जांच कराने, आवश्यक दवाइयों की कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने तथा आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाकर अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ देने की मांग की है।
कोठारी ने अपने पत्र में कहा कि कोरोना महामारी के बाद देशभर में हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के मामलों में चिंताजनक वृद्धि देखने को मिल रही है। इसके अलावा मधुमेह, उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और थायराइड जैसी बीमारियों से प्रभावित लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इन बीमारियों के बढ़ने के संभावित कारणों में कोरोना संक्रमण के दीर्घकालिक प्रभाव, बदलती जीवनशैली और खाद्य पदार्थों में बढ़ते रासायनिक तत्वों की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है। ऐसे में इन सभी पहलुओं का वैज्ञानिक अध्ययन कर वास्तविक कारणों का पता लगाया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों का उपचार आज बेहद महंगा हो गया है। आवश्यक जांचें और जीवनरक्षक दवाइयां आम नागरिक की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। दवा कंपनियों द्वारा आवश्यक दवाइयों के दामों में लगातार वृद्धि किए जाने से मरीजों और उनके परिजनों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कोठारी ने मांग की कि आवश्यक दवाइयों के मूल्य निर्धारण और नियंत्रण के लिए प्रभावी मूल्य नियंत्रण बोर्ड का गठन किया जाए अथवा वर्तमान व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जाए, ताकि दवा कंपनियों की मनमानी पर रोक लग सके और आम लोगों को उचित मूल्य पर दवाइयां उपलब्ध हो सकें।
पत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि किसी परिवार का एक सदस्य भी यदि गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाए तो पूरा परिवार आर्थिक, मानसिक और भावनात्मक संकट से घिर जाता है। उपचार की महंगी लागत के कारण कई परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक कठिनाइयां उत्पन्न हो जाती हैं।
कोठारी ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में संचालित आयुष्मान भारत योजना की सराहना करते हुए कहा कि इस योजना से लाखों गरीब परिवारों को लाभ मिला है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए इसका दायरा और विस्तारित किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जिन परिवारों की वार्षिक आय 10 लाख रुपये से कम है, उन्हें भी आयुष्मान योजना के दायरे में शामिल कर आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराया जाए। साथ ही योजना के तहत उपचार के लिए निर्धारित सहायता राशि में भी वृद्धि की जाए, जिससे निम्न एवं मध्यम वर्ग के परिवारों को बेहतर आर्थिक सहायता मिल सके।
उन्होंने यह भी मांग की कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, जो हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज, कैंसर तथा अन्य गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों के मूल कारणों का गहन अध्ययन कर सरकार को विस्तृत रिपोर्ट और सुझाव प्रस्तुत करे। इन सुझावों के आधार पर प्रभावी नीतियां बनाकर इन बीमारियों की रोकथाम, नियंत्रण और निवारण सुनिश्चित किया जा सके।
पूर्व गृह मंत्री ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी आग्रह किया कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा उपचार के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सहायता राशि के बराबर अतिरिक्त राशि राज्य सरकार भी उपलब्ध कराए, ताकि प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को गंभीर बीमारियों के उपचार में पर्याप्त आर्थिक सहयोग मिल सके। उन्होंने यह भी मांग की कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों में भर्ती मरीजों को उपचार अवधि के दौरान आवश्यक दवाइयां भी सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएं।
कोठारी ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि केंद्र और राज्य सरकार इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ ठोस एवं दूरदर्शी निर्णय लेती हैं तो करोड़ों निम्न एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी। साथ ही गंभीर बीमारियों की रोकथाम, समय पर उपचार और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों का स्वास्थ्य और भविष्य अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
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