शिवगढ़ के सघन वन में कलेक्टर का 6 किमी पैदल सफर : चेकडैम का पानी पीकर बोले— हिमालयन जैसा स्वाद
जारोपण के माध्यम से 3 लाख से अधिक पौधों की नर्सरी भी तैयार की गई है। आगामी चरण में एक लाख नए पौधे लगाने की तैयारी है, जबकि आने वाले वर्षों में कुल 5 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज़) सैलाना क्षेत्र के शिवगढ़ वन परिक्षेत्र में विकसित किए जा रहे सघन वन और जल संरक्षण कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर अजय कटेसरिया ने करीब 6 किलोमीटर पैदल भ्रमण किया। निरीक्षण के दौरान एक चेकडैम में जमा पानी को चखने के बाद कलेक्टर ने उसके स्वाद की तुलना हिमालयन ड्रिंकिंग वाटर से की। उन्होंने जल संरक्षण और सघन वन विकास के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रयासों का लाभ आने वाले वर्षों में पर्यावरण के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिलेगा।
कलेक्टर ने हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित किए जा रहे लगभग 859 हेक्टेयर क्षेत्र का निरीक्षण कर पौधरोपण, पौधों के रखरखाव, जल संरचनाओं और स्थानीय समुदाय की भागीदारी की जानकारी ली।
चेकडैम का पानी पीकर बोले- हिमालयन ड्रिंकिंग वाटर जैसा स्वाद
भ्रमण के दौरान कलेक्टर अजय कटेसरिया ने वन क्षेत्र में निर्मित चेकडैम और अन्य जल संरचनाओं का निरीक्षण किया। एक चेकडैम में जमा स्वच्छ पानी को देखकर उन्होंने स्वयं उसका स्वाद चखा। इसके बाद उन्होंने कहा कि पानी का स्वाद हिमालयन ड्रिंकिंग वाटर जैसा है।
कलेक्टर ने कहा कि वर्षा जल का संरक्षण पर्यावरण और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने जल संरचनाओं की नियमित देखरेख और इनके दीर्घकालीन संरक्षण पर भी जोर दिया।
तीन वर्षों में 2 लाख पौधे, अब 5 लाख पौधों का लक्ष्य
हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट द्वारा शिवगढ़ वन परिक्षेत्र में लगभग 859 हेक्टेयर क्षेत्र में सघन वन विकसित किया जा रहा है। परियोजना के तहत पिछले तीन वर्षों में करीब 2 लाख पौधों का रोपण और रखरखाव किया गया है।
बीजारोपण के माध्यम से 3 लाख से अधिक पौधों की नर्सरी भी तैयार की गई है। आगामी चरण में एक लाख नए पौधे लगाने की तैयारी है, जबकि आने वाले वर्षों में कुल 5 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
56 चेकडैम से 45 करोड़ लीटर जल संरक्षण का प्रयास
परियोजना के तहत जल संरक्षण के लिए लगभग 56 चेकडैम बनाए गए हैं। इनके माध्यम से करीब 45 करोड़ लीटर वर्षा जल के संचयन का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा तीन सरोवरों में लगभग 2 करोड़ लीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता विकसित की गई है।
इन जल संरचनाओं से करीब 75 रेन गन और 70 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पौधों और वन क्षेत्र की सिंचाई की जा रही है।
14 गांवों को मिलेगा लाभ, महिलाओं को भी रोजगार
परियोजना क्षेत्र के आसपास की तीन ग्राम पंचायतों के 14 गांवों को जल संरक्षण और पर्यावरणीय गतिविधियों से लाभ मिलने की संभावना है। परियोजना के नर्सरी और अन्य कार्यों में स्थानीय समुदाय को भी जोड़ा गया है, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की भागीदारी बताई गई है।
ग्राम वन समितियों के सहयोग से पौधरोपण, प्राकृतिक संसाधनों का विकास, जल प्रबंधन, बिगड़े वनों का सुधार और वन सुरक्षा से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं।
अतिक्रमण की स्थिति भी देखी, सुरक्षा के निर्देश
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने वन क्षेत्र में अतिक्रमण की स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से वन क्षेत्र की सुरक्षा और संरक्षण की जानकारी लेते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि पौधरोपण के साथ पौधों की सुरक्षा और देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जल संरचनाओं और विकसित किए जा रहे वन क्षेत्र की निरंतर निगरानी की आवश्यकता है, ताकि यह क्षेत्र भविष्य में हरित और जल संरक्षण के बेहतर मॉडल के रूप में विकसित हो सके।
कलेक्टर ने लगाया चंपा का पौधा
भ्रमण के दौरान कलेक्टर अजय कटेसरिया ने वन क्षेत्र में चंपा का पौधा भी लगाया। उन्होंने कहा कि पौधा लगाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी उसका संरक्षण और नियमित देखभाल है, ताकि वह वृक्ष के रूप में विकसित हो सके।
हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के जिला समन्वयक निलेश शुक्ला ने कलेक्टर को शिवगढ़ परियोजना की गतिविधियों की जानकारी दी। इस दौरान सैलाना एसडीएम कृष्णपाल सिंह बघेल, तहसीलदार मनीष जैन सहित संबंधित अधिकारी और संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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