शासकीय भूमि विवाद ने पकड़ा तूल : बिनौली से रतलाम तक पैदल मार्च : कलेक्टर से मुलाकात के आश्वासन पर थमा आंदोलन
दरअसल, ग्राम बिनौली में नजूल की शासकीय भूमि पर डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित किए जाने के बाद सूर्यवंशी समाज के लोगों ने पास की शासकीय जमीन पर अपने आराध्य देव के स्थान निर्माण की मांग की थी।
रतलाम (प्रकाशभारत.कॉम) रतलाम जिले के जावरा तहसील अंतर्गत ग्राम बिनौली में शासकीय भूमि को लेकर दो समाजों के बीच विवाद गहराता नजर आया। विवाद इतना बढ़ गया कि सूर्यवंशी समाज के महिला-पुरुष अपनी मांगों को लेकर रात में ही पैदल मार्च करते हुए रतलाम जिला मुख्यालय की ओर निकल पड़े।
बिनौली गांव से शुरू हुआ यह पैदल मार्च लगभग 27 किलोमीटर लंबा रहा। जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी रास्ते में ग्रामीणों को समझाने पहुंचे, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे। नामली के समीप प्रशासन द्वारा महिला प्रतिनिधिमंडल को कलेक्टर मिशा सिंह से मुलाकात करवाने का आश्वासन दिए जाने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया।
दरअसल, ग्राम बिनौली में नजूल की शासकीय भूमि पर डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित किए जाने के बाद सूर्यवंशी समाज के लोगों ने पास की शासकीय जमीन पर अपने आराध्य देव के स्थान निर्माण की मांग की थी। इस संबंध में ग्राम पंचायत और जावरा तहसीलदार को आवेदन दिया गया, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए भूमि आवंटन से इनकार कर दिया गया।
इसके विरोध में बुधवार को सूर्यवंशी समाज के लोगों ने जावरा एसडीएम कार्यालय के बाहर दिनभर धरना-प्रदर्शन किया। सुनवाई न होने पर देर रात महिलाएं और पुरुष पैदल ही कलेक्टर से मिलने के लिए रतलाम रवाना हो गए।
पैदल मार्च में शामिल मंगल सिंह ने बताया कि समाज अपनी मांग विधिवत तरीके से कलेक्टर के समक्ष रखना चाहता है। वहीं जावरा तहसीलदार पारस वेश ने बताया कि ग्रामीणों को शासकीय भूमि आवंटन से जुड़े नियमों की जानकारी दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी तत्काल भूमि समाज के नाम किए जाने की मांग कर रहे थे।
फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है।
What's Your Reaction?

