सैलाना : बस स्टैंड स्थित मौत के मुहाने पर 15 दुकानें : छज्जा गिरा : बड़ा हादसा टला : फिर भी कार्रवाई का इंतजार : प्रशासन अब भी बेखबर
जब पीडब्ल्यूडी ने दुकानों को खतरनाक घोषित कर दिया, नगर परिषद नोटिस जारी कर चुकी है और न्यायालय की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, तो आखिर कार्रवाई में देरी क्यों? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर समय रहते इन जर्जर दुकानों पर ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाएंगे?
सैलाना (प्रकाशभारत न्यूज़) नगर के बस स्टैंड स्थित सुलभ कॉम्प्लेक्स के बाहर बनी करीब 15 जर्जर दुकानें इन दिनों लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनी हुई हैं। हाल ही में एक बंद पड़ी दुकान का छज्जा अचानक भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि घटना के समय वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ी जनहानि हो सकती है।
जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) पहले ही तकनीकी जांच के बाद इन दुकानों को अत्यंत जर्जर घोषित कर चुका है। इसके आधार पर नगर परिषद ने दुकानदारों को दुकानें खाली करने के नोटिस जारी किए थे। नोटिस मिलने के बाद सात दुकानदारों ने दुकानें खाली कर दीं, जबकि अन्य दुकानदारों ने मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद नगर परिषद को सभी पक्षों की सुनवाई कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद तत्कालीन सीएमओ ने संबंधित दुकानदारों की बैठक लेकर उनकी आपत्तियां सुनीं और दोबारा नोटिस जारी किए। कुछ दुकानदार फिर से हाईकोर्ट पहुंचे, लेकिन इस बार न्यायालय ने किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार करते हुए मामला जिला प्रशासन के स्तर पर छोड़ दिया।
इसके बावजूद अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। नतीजतन जर्जर दुकानें आज भी उसी हालत में खड़ी हैं और राहगीरों के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं।
बारिश के मौसम में स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई है। लगातार बारिश के कारण दीवारें, छज्जे और छतें कमजोर होती जा रही हैं। हाल ही में छज्जा गिरने की घटना ने इस खतरे को और स्पष्ट कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि व्यस्त समय में किसी दुकान का हिस्सा गिर गया तो बड़ा हादसा हो सकता है।
इन दुकानों के सामने से प्रतिदिन सैकड़ों लोग, महिलाएं, स्कूली बच्चे और वाहन चालक गुजरते हैं। आसपास बाजार होने के कारण यहां दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में किसी भी समय होने वाली दुर्घटना कई परिवारों के लिए दुखद साबित हो सकती है।
जनता में बढ़ रहा रोष
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब संबंधित विभाग भवनों को जर्जर घोषित कर चुका है और न्यायिक प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, तब कार्रवाई में हो रही देरी समझ से परे है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता के कारण खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल
जब पीडब्ल्यूडी ने दुकानों को खतरनाक घोषित कर दिया, नगर परिषद नोटिस जारी कर चुकी है और न्यायालय की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, तो आखिर कार्रवाई में देरी क्यों? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर समय रहते इन जर्जर दुकानों पर ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाएंगे?
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