पोषण आहार के कथित 800 करोड़ रुपये के घोटाले में लोकायुक्त सख्त : लोकायुक्त के 14 पत्र, विभाग ने पांच बार मांगा समय, फिर भी 800 करोड़ के कथित पोषण आहार मामले में नहीं सौंपी कार्रवाई रिपोर्ट
पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने कहा कि यदि किसी विभाग को बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद वर्षों तक कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया जाता, तो इससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।
भोपाल (प्रकाशभारत न्यूज़) पूर्व विधायक पारस सकलेचा द्वारा महालेखाकार (एजी) की वर्ष 2018 से 2021 के दौरान आठ जिलों में पोषण आहार व्यवस्था की जांच के आधार पर 28 अगस्त 2023 को लोकायुक्त में लगभग 800 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, तत्कालीन संचालक मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ललित मोहन बेलवाल सहित अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी।
शिकायत में ललित मोहन बेलवाल की कथित नियम-विरुद्ध संविदा नियुक्ति, उन्हें वित्तीय अधिकार दिए जाने, उनके विरुद्ध वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की जांच में प्रतिकूल निष्कर्ष आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने तथा शिकायत उठाने वाले अधिकारियों को प्रताड़ित किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की भूमिका से संबंधित दस्तावेज भी शिकायत के साथ प्रस्तुत किए गए हैं।
लोकायुक्त कार्यालय ने महालेखाकार की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन प्राप्त करने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को अब तक 14 पत्र भेजे हैं। पहला पत्र 30 अक्टूबर 2023 को और 14वां पत्र 23 जून 2026 को अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को भेजा गया। इसके बावजूद विभाग अब तक कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं कर सका है।
रिकॉर्ड के अनुसार विभाग ने स्वयं पांच बार अतिरिक्त समय मांगा। 20 नवंबर 2023, 14 अगस्त 2024, 15 अक्टूबर 2024, 13 नवंबर 2024 और 20 मार्च 2025 को भेजे गए पत्रों में विभाग ने एक से दो माह का अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। लोकायुक्त ने प्रत्येक बार समय-वृद्धि की अनुमति दी, लेकिन विस्तारित अवधि समाप्त होने के बाद भी कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया।
लोकायुक्त कार्यालय ने प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से भी कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा, लेकिन वहां से भी अपेक्षित जानकारी प्राप्त नहीं हुई।
8 जून 2026 को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रस्तुत जानकारी पर लोकायुक्त ने टिप्पणी की कि उपलब्ध कराई गई जानकारी मांगी गई जानकारी के अनुरूप नहीं है तथा उसमें विरोधाभास है। इसके बाद प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को 24 अगस्त 2026 को कार्रवाई प्रतिवेदन सहित लोकायुक्त कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने कहा कि यदि किसी विभाग को बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद वर्षों तक कार्रवाई प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया जाता, तो इससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि 24 अगस्त 2026 की सुनवाई में संबंधित विभाग महालेखाकार की रिपोर्ट पर अब तक की गई कार्रवाई का तथ्यात्मक विवरण लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने कहा कि पोषण आहार जैसी संवेदनशील योजना प्रदेश की लाखों माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा कार्रवाई में अनावश्यक विलंब जनहित और सार्वजनिक विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय है।
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