सैलाना :18.98 लाख की डी-स्लेजिंग मशीन खरीदी पर सियासत गरम : अध्यक्ष बोले— “भुगतान ही नहीं हुआ, फिर घोटाला कैसा?”
विधायक डोडियार के आरोपों पर परिषद अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला की प्रेस वार्ता, बोले— “पूरी परिषद की छवि खराब करने की कोशिश”
सैलाना (प्रकाशभारत न्यूज़) डी-स्लेजिंग मशीन एवं ट्रैक्टर खरीदी मामले में क्षेत्रीय विधायक कमलेश्वर डोडियार द्वारा लगाए गए कथित घोटाले के आरोपों के बाद सैलाना नगर परिषद की राजनीति गरमा गई है। सोमवार देर शाम विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में मंगलवार दोपहर नगर परिषद अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला ने परिषद कार्यालय में पत्रकार वार्ता आयोजित कर पूरे मामले का क्रमवार खुलासा किया और आरोपों को “झूठा, भ्रामक और तथ्यहीन” बताया।
अध्यक्ष शुक्ला ने कहा कि जिस खरीदी को लेकर घोटाले की बात कही जा रही है, उसमें अब तक किसी प्रकार का भुगतान ही नहीं हुआ है। ऐसे में घोटाले का आरोप समझ से परे है। उन्होंने कहा कि विधायक द्वारा पूर्व में मांगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जा चुके हैं और पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ की गई है।
शुक्ला ने कहा कि बिना किसी सक्षम अधिकारी की जांच रिपोर्ट के किसी मामले को “घोटाला” कहना न केवल गलत है, बल्कि इससे पूरी परिषद और जनप्रतिनिधियों की छवि धूमिल होती है। उन्होंने कहा कि विधायक एक संवैधानिक पद पर हैं, इसलिए उन्हें तथ्यों के आधार पर ही बयान देना चाहिए।
ऐसे हुई खरीदी की पूरी प्रक्रिया
नगर परिषद अध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि 29 नवंबर 2024 को परिषद द्वारा डी-स्लेजिंग मशीन मय ट्रैक्टर वाहन खरीदी के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसके बाद 26 दिसंबर 2024 को पीआईसी से प्रशासकीय स्वीकृति मिली तथा 2 जून 2025 को शासन से अनुमति प्राप्त हुई।
6 जून 2025 को ऑनलाइन टेंडर जारी किए गए, जिसमें कुल 8 टेंडर प्राप्त हुए। इनमें से 6 टेंडर तकनीकी रूप से अपात्र पाए गए। शेष दो टेंडरों में हिन्द ट्रेडिंग कंपनी इंदौर का 18 लाख 98 हजार रुपए का टेंडर स्वीकृत किया गया और 3 नवंबर 2025 को कार्यादेश जारी हुआ।
कंपनी द्वारा 6 नवंबर 2025 को मशीन एवं ट्रैक्टर नगर परिषद को उपलब्ध करा दिए गए। इसके बाद 6 फरवरी 2026 को जावरा पॉलिटेक्निक कॉलेज के दो टेक्निकल विशेषज्ञों से मशीन और वाहन का भौतिक सत्यापन कराया गया। 9 मार्च 2026 को तकनीकी जांच रिपोर्ट संतोषजनक प्राप्त हुई।
अध्यक्ष शुक्ला ने बताया कि हाल ही में 13 मई 2026 को शासन द्वारा संयुक्त खाते में 17 लाख 10 हजार रुपए की राशि जमा कराई गई है। भुगतान की प्रक्रिया वरिष्ठ कार्यालय द्वारा की जानी है और फिलहाल कंपनी को कोई भुगतान नहीं हुआ है।
“भुगतान बाकी, फिर घोटाला किस बात का?”
पत्रकार वार्ता में अध्यक्ष शुक्ला ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब अभी तक भुगतान ही नहीं हुआ, तो फिर घोटाले का आरोप किस आधार पर लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह विषय अब स्वयं जांच का विषय बन गया है कि बिना तथ्य के ऐसे आरोप क्यों लगाए गए।
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