मित्र पचास की जगह भले ही पाँच बनाओ लेकिन सच्चे बनाओ : डॉ संयमलता म सा : मित्रता दिवस पर जैन स्थानक नीमचौक मे हुआ अनूठा आयोजन
आजकल की दोस्ती कागज के फूल, दिखने में सुंदर और सूंघने में धूल। दोस्त पचास की जगह भले ही पाँच बनाओ लेकिन सच्चे बनाओ। जब पास में पैसा था होटलों में पार्टी देते थे तब चारों तरफ दोस्तों की महफ़िल रहती थी, लेकिन व्यापार में घाटा हो गया तंगी आ गई तो अधिकतर दोस्त आपका फोन भी नही उठाएंगे। वो दोस्त ही क्या जो बुरे वक्त में दोस्त के काम न आए
रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज) पति/पत्नि का चयन परिवार द्वारा किया जाता है और संतान प्रकृती की देन है लेकिन मित्र हम स्वयं बनाते है। इसलिये मित्र बहुत सोच समझकर देख परख कर बनाना चाहिए। लड़के लड़की की शादी के लिये परिवार घर बार देखते है लेकिन उसके मित्र कैसे है यह बात देखना बहुत जरूरी है कि लड़के/लड़की की संगत कैसी है। व्यक्ति अपने दिल की हर एक बात माँ बाप, पति/पत्नि को बताए न बताए लेकिन अपने मित्र को जरूर बताता है । हर किसी व्यक्ति को अपने घर के दरवाजे पर मत लाना मित्र बहुत देखकर सोच समझ कर बनाना।
आजकल की दोस्ती कागज के फूल, दिखने में सुंदर और सूंघने में धूल। दोस्त पचास की जगह भले ही पाँच बनाओ लेकिन सच्चे बनाओ। जब पास में पैसा था होटलों में पार्टी देते थे तब चारों तरफ दोस्तों की महफ़िल रहती थी, लेकिन व्यापार में घाटा हो गया तंगी आ गई तो अधिकतर दोस्त आपका फोन भी नही उठाएंगे। वो दोस्त ही क्या जो बुरे वक्त में दोस्त के काम न आए। संगत का असर ऐसा होता है कि दूध की दुकान पर बैठकर शराब भी पियेगा तो लोग कहेंगे कि दूध पी रहा है और शराब की दुकान पर बैठकर दूध भी पिया तो लोग शराबी कहेंगे। मित्रता भी अपनी अपनी सीमा होती है, घनिष्ठ मित्र घर तक, व्यवसायिक मित्र दुकान तक, ऑफिस के मित्र ऑफिस तक, अपने हर किसी दोस्त को घर के अंदर तक कि एंट्री नही करवाना चाहिए। उक्त विचार नीमचौक जैन स्थानक पर आयोजित मित्रता दिवस पर आयोजित धर्मसभा जैन दिवाकरीय महासती डॉ संयमलता म सा ने व्यक्त किये ।
आपने फरमाया की फूलों का सार होता है इत्र और जीवन का सार होता है मित्र। अच्छे दोस्त बनाओगे तो जीवन आबाद हो जाएगा और बुरे दोस्त बनाओगे तो जीवन बर्बाद हो जाता है। पक्षी आया पानी पिया और उड़ गया ऐसे दोस्त स्वार्थी होते है जो खाए पिये और खिसके। गुटका, सिमटेट, शराब, ड्रग्स ये सब जो व्यसन आज की युवा पीढ़ी में लग रहे है वे केवल बुरी संगत की दोस्ती का असर है। आजकल कई बच्चे स्कूल, कॉलेज और होस्टल में गलत संगत गलत दोस्तों के ग्रुप में जुड़कर अपना जीवन बर्बाद कर लेते है। महासती जी कृष्ण और सुदामा की मित्रता पर मधुर गीतों के माध्यम से इतना करुणामय और मार्मिक प्रवचन दिया कि सभा में उपस्थित कई लोगो की आँखे नम हो गई। जैन दर्शन में भी कहा गया है मित्ति में सव्व भुवेसु (प्राणी मात्र से मेरी मित्रता रहे) । मित्रता कृष्ण और सुदामा जैसी होना चाहिए जिसमें ऊंच नीच, अमीरी गरीबी नही देखी जाती है । दोस्त बनाओ तो पानी और मछली की तरह की मछली पानी के बिना रह न सके। मित्र जीवन का आईना होता है। धीरज धरम मित्र और नारी, आपातकाल में परखिये चारी । मित्र ऐसा कीजिये जैसे लोटा और डोर, गला फंसाए आपणो पानी पिये और। कोई दोस्त अगर गलत रास्ते पर जा रहा है तो उसे रोको, ये आपका कर्तव्य है।
श्री संघ अध्यक्ष अजय खीमेसरा ने बताया की फ्रेंडशिप डे के अवसर पर महासतिया जी म सा के सानिध्य मे समाज् मे यह अपने आप मे अनूठा आयोजन हुआ है । इस आयोजन मे पिता पुत्र, भाई बहन, सास बहु, बहन बहन, देवरानी जेठानी ने एक दूसरे को मे जीव दया प्रेमी, मे प्राणी मात्र प्रेमी, मे पशु प्रेमी के फ्रेंडशिप बेल्ट बांधे ओर एक दूसरे के दुख दर्द को समझने का मार्गदर्शन महासतिया जी ने दिया । एक प्रण, एक संकल्प ओर एक अभियान की शुरुवात अपने घर, परिवार से करने का संकल्प लिया ओर जीवो के प्रति ओर अपनों के प्रति मित्रता कैसे निभाए इस का भी सभी को संकल्प दिलाया गया ।
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