अल्पवर्षा से जल संकट की आहट, अब भी नहीं जागा नगर निगम : पूर्व महापौर शैलेन्द्र डागा ने उठाए सवाल : शहर की सभी बोरिंग का सर्वे कराने और शोधित पानी के पुनः उपयोग की योजना बनाने का दिया सुझाव
डागा ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि जल संकट से निपटने के लिए शहर की सभी बोरिंग का सर्वे और भौतिक सत्यापन, वैकल्पिक जल स्रोतों का उपयोग, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले शोधित पानी का पुनः उपयोग तथा आमजन की भागीदारी से जल संरक्षण जैसे उपायों पर एक साथ काम करना होगा।
रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज़) अल्पवर्षा के चलते आगामी ग्रीष्मकाल में रतलाम शहर पर जल संकट का खतरा मंडराने लगा है। धोलावाड़ बांध में भी अब तक लगभग 45 प्रतिशत जल संग्रहण होने के बीच भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अभी से ठोस कदम उठाना जरूरी है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन की ओर से जल संरक्षण, पानी की बर्बादी रोकने और वैकल्पिक जल स्रोतों के प्रभावी उपयोग को लेकर कोई व्यापक पहल सामने नहीं आई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व महापौर शैलेन्द्र डागा ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए नगर निगम को समय रहते सुनियोजित कार्ययोजना बनाकर उस पर अमल करने की आवश्यकता बताई है।
डागा ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि जल संकट से निपटने के लिए शहर की सभी बोरिंग का सर्वे और भौतिक सत्यापन, वैकल्पिक जल स्रोतों का उपयोग, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले शोधित पानी का पुनः उपयोग तथा आमजन की भागीदारी से जल संरक्षण जैसे उपायों पर एक साथ काम करना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि नगर निगम इन कार्यों की प्राथमिकता तय कर समयबद्ध कार्ययोजना बनाए और आवश्यक बजट के लिए शासन से राशि की मांग करे।
बारिश कम होने के संकेत थे, फिर भी तैयारी क्यों नहीं?
पूर्व महापौर डागा ने कहा कि बारिश के मौसम से पहले ही अल नीनो के संभावित प्रभाव के चलते कम वर्षा की आशंका जताई जा रही थी। ऐसी परिस्थितियों में नगर निगम को वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने, भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने और नागरिकों को बारिश की प्रत्येक बूंद सहेजने के लिए प्रेरित करने के प्रयास शुरू कर देने चाहिए थे।
अब बारिश का मौसम बीत चुका है और अपेक्षाकृत कम वर्षा के कारण आगामी महीनों में जल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे में नगर निगम को जल संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के साथ ही उपलब्ध जल संसाधनों का आकलन कर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयारी करनी चाहिए।
शहर की सभी बोरिंग का सर्वे कराएं, मोटर-पंप की स्थिति भी जांचें
डागा ने सुझाव दिया कि नगर निगम के स्वामित्व वाली सभी बोरिंग का व्यापक सर्वे और भौतिक सत्यापन कराया जाए। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी बोरिंग चालू हैं, कितनी बंद हैं और किन क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता कम हुई है। जहां आवश्यक हो, वहां तकनीकी जांच के बाद मोटर-पंप और अन्य उपकरणों की मरम्मत या व्यवस्था की जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर इन जल स्रोतों का उपयोग किया जा सके।
उन्होंने कहा कि केवल बोरिंग की संख्या दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक बोरिंग की कार्यशील स्थिति, जल उपलब्धता और रखरखाव का रिकॉर्ड तैयार किया जाना चाहिए। इससे आगामी गर्मी में उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां वैकल्पिक जल व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, बोरिंग का उपयोग भूजल की उपलब्धता और तकनीकी व्यवहार्यता का आकलन करने के बाद ही किया जाना चाहिए।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के शोधित पानी का हो पुनः उपयोग
पूर्व महापौर ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले शोधित पानी के पुनः उपयोग की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उपचारित पानी का इस्तेमाल उद्योगों, निर्माण कार्यों, उद्यानों और अन्य गैर-पेय कार्यों में किया जा सकता है।
इससे पेयजल की मांग पर दबाव कम करने और बांध तथा भूजल जैसे स्रोतों पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है। इसके लिए नगर निगम को ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता, प्रतिदिन उपलब्ध शोधित पानी की मात्रा, उसकी गुणवत्ता और संभावित उपभोक्ताओं का आकलन करना चाहिए। आवश्यकता के अनुसार पाइपलाइन, भंडारण और वितरण व्यवस्था विकसित करने के लिए विस्तृत परियोजना तैयार की जा सकती है। शोधित पानी का उपयोग निर्धारित मानकों और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।
पाइपलाइन लीकेज रोकें, पानी की बर्बादी पर हो कार्रवाई
डागा ने शहर में पानी की बर्बादी पर चिंता जताते हुए कहा कि पाइपलाइनों से पानी का व्यर्थ बहना, सार्वजनिक नलों और टंकियों से अनावश्यक अपव्यय तथा वाहन और सड़कें धोने में जरूरत से ज्यादा पानी खर्च करना गंभीर विषय है। नगर निगम को पाइपलाइन लीकेज की तत्काल मरम्मत, सार्वजनिक नलों की निगरानी और पानी की अनावश्यक खपत रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का विषय है। घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी बचाने के उपाय अपनाने के साथ ही वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना जरूरी है। पानी की बर्बादी के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जल संकट से निपटने की रूपरेखा बनाकर शासन से मांगें राशि
पूर्व महापौर डागा ने कहा कि नगर निगम को शहर के जल स्रोतों की स्थिति, आगामी महीनों की संभावित मांग और उपलब्ध संसाधनों का आकलन कर समग्र कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। इसमें बोरिंग का सर्वे, खराब मोटर-पंप की मरम्मत, पाइपलाइन लीकेज रोकने, वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने और शोधित पानी के पुनः उपयोग जैसे उपाय शामिल किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिन कार्यों के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता है, उनके प्रस्ताव तैयार कर शासन से आवश्यक राशि मांगी जाए। साथ ही, प्रत्येक कार्य की प्राथमिकता और समयसीमा तय कर नियमित समीक्षा की व्यवस्था की जाए। जल संकट से निपटने के लिए केवल बैठकों और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर परिणाम देने वाले कदम उठाने होंगे।
श्री डागा ने कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण और वैकल्पिक जल स्रोतों के बेहतर उपयोग की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए, तो आगामी ग्रीष्मकाल में शहरवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नगर निगम प्रशासन को अभी से सक्रिय होकर उपलब्ध जल संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि आने वाले महीनों में संभावित जल संकट के प्रभाव को कम किया जा सके।
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