मप्र में राजनीतिक नियुक्तियों की आहट : रतलाम में आरडीए अध्यक्ष पद को लेकर तेज हुई सियासत
दावेदारों की इस दौड़ में एक नाम ऐसा भी है जो भले ही खुलकर प्रयासरत नहीं दिख रहा, लेकिन मजबूत दावेदार माना जा रहा है—पूर्व आरडीए अध्यक्ष अशोक पोरवाल।
चर्चा चौराहे की.........
सुजीत उपाध्याय
मध्यप्रदेश में जैसे ही राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू हुई है, वैसे ही रतलाम में भी नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। लंबे समय से रतलाम विकास प्राधिकरण (आरडीए) के अध्यक्ष पद का सपना संजोए बैठे नेता अब अपने-अपने आकाओं तक पहुंच बनाकर दावेदारी मजबूत करने में जुट गए हैं।
शहर में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि आखिर आरडीए का अगला अध्यक्ष कौन बनेगा। दावेदारों की सूची लंबी है—कोई खुद को सांसद का करीबी बता रहा है, तो कोई मंत्री का खास। सिंधिया क़े करीबी नेता भी इस पद की लिए ताल ठोक रहे है। वहीं कुछ नेता संगठन के भरोसे इस पद तक पहुंचने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
इसी बीच मंत्री के एक खास सिपहसालार और व्यवसायी ने तो खुलकर यह कहना भी शुरू कर दिया है कि “भैय्या जी” ने उनका नाम तय कर दिया है, अब सिर्फ आधिकारिक पत्र आने का इंतजार है। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल और तेज कर दी है।
दावेदारों की इस दौड़ में एक नाम ऐसा भी है जो भले ही खुलकर प्रयासरत नहीं दिख रहा, लेकिन मजबूत दावेदार माना जा रहा है—पूर्व आरडीए अध्यक्ष अशोक पोरवाल। पूर्व में महापौर प्रत्याशी घोषित होने के बाद नाम कटने से नाराज रहे पोरवाल को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी को दरकिनार कर आरडीए अध्यक्ष बनाया था।
हालांकि पोरवाल खुद इस बार सक्रिय रूप से दावेदारी नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनकी संगठन में मजबूत पकड़, साफ छवि और जिला नेतृत्व से नजदीकी उन्हें फिर से इस पद की दौड़ में खड़ा कर देती है। मंत्री से उनके रिश्तों में खटास भी किसी से छुपी नहीं है, जो इस राजनीतिक समीकरण को और दिलचस्प बना रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि संगठन की चली, तो एक स्वच्छ छवि वाला कार्यकर्ता अध्यक्ष बन सकता है। वहीं अगर मंत्री की पसंद हावी रही, तो उनका करीबी इस पद पर काबिज हो सकता है।
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