रतलाम कांग्रेस में कलह :आखिर क्यों देना पड़ा गेहलोत को इस्तीफा : संगठन की अंदरूनी कलह आई खुलकर सामने
स्थानीय कांग्रेस नेताओं में इस घटनाक्रम को लेकर तीखी चर्चाएं हैं। कई नेताओं का खुला आरोप है कि जिला अध्यक्ष को दरकिनार कर ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई, जिससे संगठन में असंतोष फूट पड़ा।
रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज़) जिला कांग्रेस कमेटी रतलाम में मंगलवार को बड़ा राजनीतिक विस्फोट हो गया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष हर्ष विजय गेहलोत ने अपने पद से इस्तीफा देकर संगठन को गहरे संकट में डाल दिया। उनके अचानक लिए गए इस फैसले से कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और नेतृत्व की कमजोर पकड़ पूरी तरह उजागर हो गई है।
इस्तीफे का समय और परिस्थितियां साफ संकेत दे रही हैं कि मामला केवल “पारिवारिक दायित्व” तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही गंभीर खींचतान इसका असली कारण है। यह घटनाक्रम ठीक उस समय सामने आया है, जब बीती रात ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की सूची जारी की गई थी। सूत्रों के अनुसार प्रदेश कांग्रेस ने जिला कांग्रेस की सर्वम्मति वाली सूची मे जावरा के ब्लॉक अध्यक्षों के नाम बदल दिए वही आलोट ली सूची को होल्ड पर रख दिया
हालांकि अपने त्यागपत्र में हर्ष विजय गेहलोत ने पारिवारिक जिम्मेदारियों और सैलाना विधानसभा क्षेत्र के दायित्वों का हवाला दिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे दबाव और संगठनात्मक उपेक्षा का नतीजा माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका मोबाइल फोन बंद मिला, जिससे स्थिति और अधिक संदेहास्पद हो गई है।
गौरतलब है कि महज चार महीने पहले ही गेहलोत को दूसरी बार जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था। इतने कम समय में पद छोड़ देना यह साबित करता है कि जिले में कांग्रेस संगठन पूरी तरह दिशाहीन और आपसी मतभेदों में उलझा हुआ है।
इस्तीफे का सीधा असर पार्टी की गतिविधियों पर भी पड़ा है। कांग्रेस द्वारा आज मनरेगा के नाम बदलने के विरोध में प्रस्तावित आंदोलन को आनन-फानन में स्थगित करना पड़ा। नेतृत्व विहीन संगठन आंदोलन तो दूर, आंतरिक संतुलन भी नहीं संभाल पा रहा है।
स्थानीय कांग्रेस नेताओं में इस घटनाक्रम को लेकर तीखी चर्चाएं हैं। कई नेताओं का खुला आरोप है कि जिला अध्यक्ष को दरकिनार कर ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी गई, जिससे संगठन में असंतोष फूट पड़ा।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन इतना तय है कि यह इस्तीफा रतलाम कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। अब सवाल यह है कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व इस बिखरते संगठन को कैसे संभालेगा और जिले में नेतृत्व का भरोसा कैसे बहाल करेगा।
What's Your Reaction?



