महापौर जी, जनता की भावनाओं से खिलवाड़ आपको चैन से सोने नहीं देगी
चर्चा चौराहे की..........
रावण अधूरा क्या जला, भैय्या जी का चेहरा तमतमा गया, आंखे लाल हो गई, जो बता रही थी कि उन्हें अब तो अपनी गलती का एहसास हो ही गया होगा कि उन्होंने कैसे घोड़े पर दाव लगाया था। जिसकी वजह से आज पूरे शहरवासियों को निराश होना पड़ा । लोग कैसे सार्वजनिक तौर पर मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए स्टेडियम के बाहर निकल रहे थे। बच्चे और महिलाएं मायूस थे जिस रावण दहन का इंतजार साल भर से करते आ रहे थे उसकी व्यवस्थाओं कि नगर निगम को रत्ती भर भी चिंता नहीं थी।
शहर में चर्चा जोरो पर है कि जनता के पैसे से अरबो रुपए का बजट बनाने वाली नगर निगम के पास , उसी जनता के मनोरंजन के लिए ढंग की आतिशबाजी तक नहीं थी। अच्छा रावण का पुतला बनाना तो दूर की बात है।
यह सब देखकर तो अब भैय्या जी भी सोच रहे होंगे कि अगली बार तो अपने फाउंडेशन से ही ढंग का रावण दहन का कार्यक्रम करवा दूं, जिससे लोगो कि नाराजगी कम हो सके ।
खैर इससे अच्छे रावण दहन तो जवाहर नगर सहित रतलाम शहर के गली मोहल्ले में छोटे-छोटे बच्चों ने कर दिए रतलाम नगर निगम को कुछ सीखना चाहिए।
खैर मां कालिका माता मेले में 100 के 60 करने वाले नेता हो अधिकारी हो या कोई भी जिम्मेदार हो उसे माता के प्रकोप से कोई रोक नहीं पाएगा चाहे तो इतिहास उठाकर देख लो।
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