एक बेजुबान के लिए इंसानों जैसा सम्मान : खरगोश की मौत पर गांव में पसरा मातम : मालिक ने डुग्गु की याद में बनवाया चबूतरा : पूरे गांव को कराया मृत्यु भोज :अनोखी श्रद्धांजलि बनी चर्चा का विषय

गांव के किसान सुजान सिंह चौहान और उनके परिवार ने वर्षों पहले खरगोश डुग्गू को अपने परिवार का हिस्सा बनाया था। वह उनके लिए महज एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य बन चुका था। परिवार ने उसे बच्चों की तरह पाला और उसकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी।

Sep 22, 2026 - 15:15
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एक बेजुबान के लिए इंसानों जैसा सम्मान : खरगोश की मौत पर गांव में पसरा मातम : मालिक ने डुग्गु की याद में बनवाया चबूतरा : पूरे गांव को कराया मृत्यु भोज :अनोखी श्रद्धांजलि बनी चर्चा का विषय

रतलाम/आलोट (प्रकाशभारत न्यूज़) जिस रिश्ते में खून का कोई नाता नहीं था, उसमें इतना अपनापन था कि बिछड़ने के बाद पूरा गांव गम में शामिल हो गया। आलोट के गुराडिया गांव में एक खरगोश की मौत के बाद हुई ग्यारहवीं और मृत्यु भोज इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है।

गांव के किसान सुजान सिंह चौहान और उनके परिवार ने वर्षों पहले खरगोश डुग्गू को अपने परिवार का हिस्सा बनाया था। वह उनके लिए महज एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य बन चुका था। परिवार ने उसे बच्चों की तरह पाला और उसकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी।

बीते कुछ समय से डुग्गू बीमार चल रहा था। करीब 11 दिन पहले उसकी मौत हो गई। डुग्गू के जाने के बाद परिवार में शोक का माहौल छा गया। लेकिन परिवार ने उसकी याद को हमेशा जिंदा रखने का फैसला किया।

ग्यारहवीं के मौके पर परिवार ने डुग्गू के लिए चबूतरा बनवाकर श्रद्धांजलि दी। इतना ही नहीं, परिवार ने पूरे गांव को भोजन करवाया। इस दौरान ग्रामीणों ने भी डुग्गू को याद किया और परिवार के साथ इस भावुक पल में शामिल हुए।

खून का रिश्ता नहीं था, फिर भी परिवार से कम नहीं था

डुग्गू और सुजान सिंह के परिवार का रिश्ता शायद शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। एक बेजुबान जानवर के साथ वर्षों में बना यह लगाव उसके जाने के बाद और गहरा नजर आया।

जिसे दुनिया शायद सिर्फ एक खरगोश के रूप में देखती थी, वह सुजान सिंह के घर में डुग्गू नाम से पहचाना जाने वाला परिवार का हिस्सा था। उसके लिए ग्यारहवीं करना और पूरे गांव को भोजन करवाना परिवार के उस लगाव की तस्वीर है, जिसे देखकर ग्रामीण भी भावुक नजर आए।

डुग्गू अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी याद में बनाया गया चबूतरा और ग्यारहवीं पर जुटा पूरा गांव उसकी कहानी को लंबे समय तक याद रखेगा।

एक बेजुबान के लिए इंसानों जैसा सम्मान—गुराडिया गांव की यह कहानी सिर्फ खरगोश की मौत की खबर नहीं, बल्कि इंसान और बेजुबान के बीच बने उस भावनात्मक रिश्ते की कहानी है, जिसे शब्दों से ज्यादा महसूस किया जा सकता है।

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Sujeet Upadhyay Sujeet Upadhyay is a senior journalist who have been working for around Three decades now. He has worked in More than half dozen recognized and celebrated News Papers in Madhya Pradesh. His Father Late shri Prakash Upadhyay was one of the pioneer's in the field of journalism especially in Malwanchal and MP.