6 लाख के चेक बाउंस मामले में आरोपी को 1 साल की सजा : अपील भी खारिज : अनुपस्थिति पर गिरफ्तारी वारंट जारी
चेक बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर अनादरित हो गए। इसके बाद गौरव सतवानी की ओर से अधिवक्ता बी.एस. पाटील के माध्यम से आरोपी को कानूनी सूचना पत्र भेजा गया, लेकिन राशि का भुगतान नहीं होने पर परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत न्यायालय में निजी परिवाद प्रस्तुत किया गया।
रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज़) भवन निर्माण और माता के इलाज के लिए कुल 6 लाख रुपये उधार लेकर चेक जारी करने के बाद भुगतान नहीं करने के मामले में न्यायालय ने आरोपी आसिफ हुसैन पिता भुरा खां, निवासी टेलीफोन कॉलोनी रतलाम को दोषी ठहराया है। आरोपी को एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही 6 लाख रुपये की चेक राशि पर 9 प्रतिशत ब्याज सहित कुल 3 लाख 78 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में जमा कराने के आदेश दिए गए हैं।
प्रकरण के अनुसार आसिफ हुसैन ने भवन निर्माण के लिए 4 लाख रुपये चेक के माध्यम से तथा अपनी माता के इलाज के लिए 2 लाख रुपये उधार लिए थे। इसके संबंध में 6 जुलाई 2017 को अनुबंध पत्र और प्रॉमिसरी नोट पर हस्ताक्षर किए गए। राशि की वापसी के लिए भारतीय स्टेट बैंक, शाखा तोपखाना रतलाम के चेक क्रमांक 776386 एवं 776387, दिनांक 6 अक्टूबर 2018, परिवादी गौरव सतवानी को दिए गए थे।
चेक बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर अनादरित हो गए। इसके बाद गौरव सतवानी की ओर से अधिवक्ता बी.एस. पाटील के माध्यम से आरोपी को कानूनी सूचना पत्र भेजा गया, लेकिन राशि का भुगतान नहीं होने पर परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत न्यायालय में निजी परिवाद प्रस्तुत किया गया।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय, रतलाम ने 20 नवंबर 2025 को मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी आसिफ हुसैन को दोषी ठहराया। न्यायालय ने प्रतिकर राशि अदा नहीं करने की स्थिति में चार माह के अतिरिक्त सश्रम कारावास का भी आदेश दिया था।
इस निर्णय के विरुद्ध आरोपी ने अपील प्रस्तुत की, जिसे सप्तम सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की अदालत ने निरस्त कर अधीनस्थ न्यायालय के निर्णय को यथावत रखा। आरोपी के अनुपस्थित रहने पर उसके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।
मामले में परिवादी गौरव सतवानी की ओर से अधिवक्ता बी.एस. पाटील एवं रूखसाना शेख, रतलाम ने पैरवी की।
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