"अंखियों के झरोखों से" में झलका मानवता और संगीत का अनूठा संगम : दृष्टिहीन खिलाड़ियों ने किया सबको प्रेरित
संस्था संरक्षक दिनेश सियाल (वाइस प्रेसिडेंट, इप्का लैबोरेट्रीज) ने स्पंदन टीम की समर्पण भावना को सराहा। अपर कलेक्टर श्रीमती लक्ष्मी गामड़ ने कहा कि “संगीत के माध्यम से मानव सेवा का यह एक अनूठा उदाहरण है।"
रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज) रत्नपुरी संस्था स्पंदन द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम "अंखियों के झरोखों से" में संगीत, संवेदना और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में अतिथियों ने नेत्रहीन राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों की प्रेरणादायक उपलब्धियों की सराहना की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रतलाम डीआईजी निमिष अग्रवाल ने कहा कि आंखों से देखे गए सपने असंभव को भी संभव बना देते हैं। हमारे राष्ट्रीय नेत्रहीन फुटबॉल खिलाड़ियों ने यह कर दिखाया है।
एसपी अमित कुमार ने स्पंदन संस्था के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन मानवता की सच्ची प्रेरणा है।
डीएसपी अजय सारवान ने कहा कि जहाँ देखने वाले भी कई बार पीछे रह जाते हैं, वहाँ ये दृष्टिहीन बच्चे अपने हौसले से मिसाल बन रहे हैं।
संस्था संरक्षक दिनेश सियाल (वाइस प्रेसिडेंट, इप्का लैबोरेट्रीज) ने स्पंदन टीम की समर्पण भावना को सराहा।
अपर कलेक्टर श्रीमती लक्ष्मी गामड़ ने कहा कि “संगीत के माध्यम से मानव सेवा का यह एक अनूठा उदाहरण है।”
संस्था मार्गदर्शक नितिन तिवारी ने रतलाम के नागरिकों का सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। स्पंदन अध्यक्ष अचल शुक्ला ने स्वागत भाषण दिया। इसके बाद स्पंदन के कलाकारों — संगीता जैन, नरेश यादव, मनोज भावसार, हर्षि भावसार, अयूब खान, लक्ष्मी गामड़, भुवि व्यास और अचल शुक्ला — ने संगीतकार रवींद्र जैन और खय्याम के गीतों से वातावरण को सुरमय कर दिया।
कार्यक्रम में विशेष रूप से श्री मोहन भर्रावत उपस्थित रहे।
नेत्रहीन राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी पूजा यादव, प्रकृति गुप्ता, मुस्कान वर्मा और फरदीन खान ने कार्यक्रम में भाग लेकर अपनी भावनाएँ साझा कीं और आयोजन की सराहना की।
इस वर्ष स्पंदन द्वारा कुल ₹11,37,230 राशि एकत्रित की गई, जिसे राष्ट्रीय नेत्रहीन फुटबॉल खिलाड़ियों, जन चेतना परिषद मुक-बधिर स्कूल, मातृछाया संस्था, अपना घर रतलाम और देवास दृष्टिहीन कन्या केंद्र को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम की सफलता में स्पंदन के 80 से अधिक सदस्यों ने अपनी जिम्मेदारियाँ निभाईं।
इसका यूट्यूब और फेसबुक पर लाइव प्रसारण भी हुआ, जिसे संगीत प्रेमियों ने खूब सराहा।
लगभग चार घंटे तक चले इस यादगार आयोजन में रतलाम के प्रशासनिक अधिकारी, गणमान्य नागरिक और संगीत प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन गीतकार अलक्षेन्द्र व्यास ने गीतों और कविताओं के माध्यम से किया, जबकि आभार प्रदर्शन विक्रम कोठारी ने किया।
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