प्रदेश में टोल की लूट में सत्ता की भागीदारी : पारस सकलेचा : अधिकारियों पर निवेशक के एजेंट की तरह काम करने का आरोप

345 करोड़ की देवास-भोपाल रोड तीन बार बिककर पहुंची हजारों करोड़ में, फिर भी घाटा दिखाकर लिया 81 करोड़ का अनुदान

Oct 5, 2025 - 17:04
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प्रदेश में टोल की लूट में सत्ता की भागीदारी : पारस सकलेचा : अधिकारियों पर निवेशक के एजेंट की तरह काम करने का आरोप

रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज) पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने प्रदेश की टोल रोड परियोजनाओं में भ्रष्टाचार, मिलीभगत और अनुचित लाभ के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और अधिकारियों की सांठगांठ से निवेशकों को लाभ पहुंचाने के लिए योजनाओं की लागत बढ़ाई गई, टोल अवधि मनमाने तरीके से बढ़ाई गई और घाटा दिखाकर करोड़ों का सरकारी अनुदान लिया गया।

देवास-भोपाल टोल रोड : लागत से छह गुना वसूली, फिर भी घाटा

सकलेचा ने बताया कि देवास-भोपाल टोल रोड की निविदा ₹426.64 करोड़ में निकली थी, परंतु बाद में “हानि” के नाम पर कंपनी को ₹81 करोड़ का अनुदान दे दिया गया। परियोजना की वास्तविक लागत ₹345.64 करोड़ रही, जबकि जून 2025 तक ₹1889.51 करोड़ की टोल वसूली हो चुकी है — यानी लागत का 564.67%

फिर भी कंपनी सरकार को ₹1 का प्रीमियम नहीं दे रही

सकलेचा ने कहा कि यह संभव हुआ क्योंकि अनुबंध की धारा 22 में अधिकारियों की मिलीभगत से प्रावधान किया गया कि यदि घाटे के लिए अनुदान मिला है तो प्रीमियम नहीं देना होगा।

उन्होंने बताया कि इस रोड की टोल अवधि 258 दिन बढ़ाकर दिसंबर 2033 तक कर दी गई है।

लाभ में कंपनी, पर सरकार को घाटा

सकलेचा ने बताया कि कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार 2017 में इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹41.28 करोड़ था, जो 2024 में ₹194.82 करोड़ तक पहुंच गया।

इसी अवधि में प्रति इक्विटी शेयर आय ₹1641.04 से बढ़कर ₹10,474.79 हो गई।

CSR फंड भी ₹12.42 लाख से बढ़कर ₹1.66 करोड़ हो गया।

उन्होंने कहा, “स्पष्ट है कि कंपनी मुनाफे में है, फिर भी सरकार घाटे का ढोंग कर रही है।”

अन्य टोल रोड भी कम नहीं

1. जावरा-नयागांव टोल रोड

लागत: ₹425.71 करोड़

वसूली: जून 2025 तक ₹2450.02 करोड़ (लागत का 575.51%)

टोल अवधि: दिसंबर 2033 तक बढ़ाई गई

2. लेबड़-जावरा टोल रोड

लागत: ₹589.31 करोड़

वसूली: जून 2025 तक ₹2182.8 करोड़ (लागत का 370.4%)

अवधि 5 वर्ष बढ़ाकर दिसंबर 2038 तक कर दी गई। यह रोड भी दो बार हजारों करोड़ में बेची जा चुकी है

दुर्घटनाओं की भयावह तस्वीर

सकलेचा ने बताया कि सिर्फ देवास-भोपाल रोड पर 2020 से 2023 तक 981 दुर्घटनाएं, 1171 घायल और 281 मौतें हुईं।

तीनों टोल रोड (देवास-भोपाल, लेबड़-जावरा, जावरा-नयागांव) मिलाकर 2937 दुर्घटनाएं, 3089 घायल और 1058 मौतें दर्ज हुईं।

कैग की रिपोर्ट (2017-18) में भी कहा गया है कि सेफ्टी ऑडिट नहीं कराए गए और यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

कैग रिपोर्ट ने उजागर की अनियमितताएं

महालेखाकार (कैग) की रिपोर्ट में टोल वसूली को लेकर कई गंभीर अनियमितताएं दर्ज हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि:

टोल आय के सत्यापन के लिए कोई विशिष्ट अध्याय अनुबंध में शामिल नहीं था। एस्क्रो खातों की निगरानी नहीं की गई। प्रतिदिन की टोल आय का सही रिकॉर्ड नहीं रखा गया।

केंद्र सरकार के निर्देशों की अनदेखी

केंद्र सरकार के आर्थिक कार्य विभाग ने जून 2006 में राज्यों को निर्देश दिए थे कि मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट (MCA) में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाए।

लेकिन राज्य सरकार ने ठेकेदारों के हित में अनुबंधों में भारी फेरबदल किए और टोल अवधि 25 से 30 साल तक बढ़ा दी, जबकि यह 10-15 वर्ष तक सीमित होनी चाहिए थी।

देवास-भोपाल, जावरा-नयागांव और लेबड़-जावरा के अनुबंध मात्र 50 दिन के अंतर से बने, फिर भी तीनों में भारी अंतर पाया गया।

केंद्र को भेजी रिपोर्ट में लिखा गया कि अनुबंध मॉडल एग्रीमेंट के अनुरूप हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत थी।

सकलेचा का आरोप : “अधिकारी बने निवेशक के एजेंट”

सकलेचा ने कहा,अधिकारियों का दायित्व जनता के हितों की रक्षा करना है। लेकिन वे निवेशकों के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं।टोल रोड योजनाएं जनता के पैसे की लूट का जरिया बन गई हैं।

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Sujeet Upadhyay Sujeet Upadhyay is a senior journalist who have been working for around Three decades now. He has worked in More than half dozen recognized and celebrated News Papers in Madhya Pradesh. His Father Late shri Prakash Upadhyay was one of the pioneer's in the field of journalism especially in Malwanchal and MP.