सैलाना नगर परिषद अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला को हाईकोर्ट से बड़ी राहत : वित्तीय अधिकार छीने जाने की याचिका खारिज
दरअसल, करीब दो माह पूर्व कांग्रेस पार्षद सलोनी मांडोत के पति प्रशांत मांडोत तथा पूर्व कांग्रेस पार्षद जीतेंद्र सिंह राठौड़ ने इंदौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में राज्य शासन के गजट नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार समाप्त करने की मांग की गई थी।
सैलाना (प्रकाशभारत न्यूज़) सैलाना नगर परिषद अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला को इंदौर हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उस याचिका को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है, जिसमें उनके वित्तीय अधिकार समाप्त किए जाने की मांग की गई थी। इसके साथ ही अब यह साफ हो गया है कि अध्यक्ष शुक्ला अपने शेष कार्यकाल तक वित्तीय अधिकारों के साथ पद पर बने रहेंगे। उनका कार्यकाल वर्ष 2027 तक जारी रहेगा।
दरअसल, करीब दो माह पूर्व कांग्रेस पार्षद सलोनी मांडोत के पति प्रशांत मांडोत तथा पूर्व कांग्रेस पार्षद जीतेंद्र सिंह राठौड़ ने इंदौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में राज्य शासन के गजट नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार समाप्त करने की मांग की गई थी। इस मामले ने राजनीतिक हलकों में काफी हलचल पैदा कर दी थी, क्योंकि कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने ही कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष हर्षविजय गेहलोत ने दोनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बाद में जवाब से असंतुष्ट होने पर पार्टी ने दोनों को छह वर्ष के लिए निष्कासित भी कर दिया था।
इस मामले में 10 अप्रैल को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई थी। उस दौरान कोर्ट ने तत्काल अध्यक्ष के वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाने से इनकार करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 13 मई को हाई कोर्ट ने याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिससे अध्यक्ष शुक्ला के वित्तीय अधिकार यथावत बने रहेंगे।
जानकारों का मानना है कि इस फैसले के बाद सैलाना नगर परिषद क्षेत्र में विकास और निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के जारी रह सकेंगे। उल्लेखनीय है कि नगर परिषद चुनाव सितंबर 2022 में हुए थे और अगले चुनाव वर्ष 2027 में संभावित हैं। आचार संहिता लागू होने से पहले तक अध्यक्ष शुक्ला के वित्तीय अधिकार जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।
अध्यक्ष चेतन्य शुक्ला की ओर से हाई कोर्ट में एडवोकेट पीयूष माथुर और ऋषि तिवारी ने पैरवी की।
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