जन्माष्टमी पर कृष्ण कृपा : तीन माह से लापता माधव प्रभु जी का "अपना घर आश्रम, रतलाम" में परिवार से हुआ भावुक मिलन
मूल रूप से राजस्थान के बूंदी जिले के निवासी श्री कजोड़ लाल जी, जो आश्रम में "माधव प्रभु जी" के नाम से विख्यात थे, लगभग तीन माह पूर्व उज्जैन के महाकाल दर्शन हेतु घर से निकले थे
रतलाम (प्रकाशभारत न्यूज) श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अपना घर आश्रम, रतलाम में ईश्वर की लीला का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब करीब तीन महीने पहले अपने घर से लापता हुए एक बुजुर्ग व्यक्ति की स्मृति लौटी और वह अपने परिवार से पुनः मिल सके।
मूल रूप से राजस्थान के बूंदी जिले के निवासी श्री कजोड़ लाल जी, जो आश्रम में "माधव प्रभु जी" के नाम से विख्यात थे, लगभग तीन माह पूर्व उज्जैन के महाकाल दर्शन हेतु घर से निकले थे। यात्रा के दौरान किसी अप्रत्याशित मानसिक आघात के कारण उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई और वह भटकते हुए रतलाम पहुंच गए।
दिनांक 18 जून 2025 को रतलाम रेलवे स्टेशन के पास स्थित टैक्सी स्टैंड से श्री राजेश जी की सूचना पर उन्हें "अपना घर आश्रम, रतलाम" लाया गया। उस समय उनकी मानसिक स्थिति अत्यंत अस्थिर थी और वे अपने बारे में कुछ भी बताने में असमर्थ थे। सेवा और सहानुभूति के साथ संस्था ने उन्हें 'माधव प्रभु जी' नाम दिया और उनके उपचार की प्रक्रिया शुरू की।
लगातार चिकित्सा सेवा, आश्रम के सेवा सहयोगियों की देखभाल और प्रभु कृपा से उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। 16 अगस्त 2025, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन, उन्होंने अचानक अपने भाई का मोबाइल नंबर याद कर लिया। आश्रम प्रभारी श्री प्रदीप जी ने तत्काल उनके परिवार से संपर्क किया और वीडियो कॉल के माध्यम से उन्हें जोड़ा।
वीडियो कॉल के माध्यम से जब श्री माधव जी की बेटी और अन्य परिवारजन उन्हें देख सके, तो भावुक दृश्य सामने आया। परिजनों ने बताया कि उन्होंने श्री माधव जी को मृत मान लिया था और उनके लापता होने की रिपोर्ट कोटा थाने में दर्ज कराई थी।
आज, 17 अगस्त 2025, आश्रम में प्रभु जी का उनके परिवार से पुनर्मिलन हुआ। आश्रम परिवार एवं उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम थीं। इस पावन क्षण को सभी ने ठाकुर श्रीकृष्ण की दिव्य कृपा बताया — जिन्होंने अपने जन्मोत्सव पर एक टूटा हुआ परिवार फिर से जोड़ दिया।
श्री माधव उर्फ कजोड़ लाल जी को उनके परिवार के साथ राजस्थान के बूंदी ज़िले के ‘नर्सरी रोड बाहरली’ निवास स्थान के लिए विदा किया गया। आश्रम परिवार ने उन्हें भावभीनी शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
"अपना घर आश्रम, रतलाम" एक बार फिर अपने सेवा कार्यों से यह सिद्ध करता है कि जब समाज से कोई टूट जाता है, तो यह स्थान उसे सहारा, सेवा और सम्मान दोनों प्रदान करता है।
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