डिजिटल अरेस्ट का खौफ, नकली कोर्ट और क्रिप्टो नेटवर्क : रतलाम में 1.34 करोड़ की अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का पर्दाफाश : डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सेवानिवृत्त प्रोफेसर को 28 दिन तक रखा मानसिक कैद
बैंक खातों से लगातार हो रहे ट्रांजेक्शन की जानकारी बेटे को मिल रही थी। जब वह स्वयं रतलाम पहुंचा, तब जाकर पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। उसी रात बेटे ने ई-एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद रतलाम पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।
रतलाम ( प्रकाशभारत.कॉम) देशभर में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड के मामलों के बीच रतलाम पुलिस ने एक बेहद संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैली साइबर ठगी का खुलासा किया है। इस मामले में रतलाम के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर को मुंबई क्राइम ब्रांच और न्यायालय की कार्रवाई का भय दिखाकर 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई। यह रकम देश के चार राज्यों से होते हुए क्रिप्टो करेंसी नेटवर्क के जरिए विदेश तक पहुंचाई गई।
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने पत्रकार वार्ता में बताया कि यह केवल आर्थिक ठगी नहीं, बल्कि पीड़ित को मानसिक रूप से तोड़ने और डिजिटल रूप से कैद रखने की साजिश थी।
मुंबई क्राइम ब्रांच बनकर शुरू हुई साजिश
15 नवंबर 2025 को फरियादी के मोबाइल पर कॉल आया। कॉलर ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम से जारी सिम का इस्तेमाल बड़े साइबर फ्रॉड में हुआ है। आरोप लगाया गया कि केनरा बैंक, मुंबई में 247 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है, जिसमें फरियादी के आधार और केवाईसी दस्तावेज लगे हैं।
गिरफ्तारी वारंट, सीबीआई जांच और जेल भेजने की धमकियों से फरियादी को भयभीत कर दिया गया। ठगों ने उनके कनाडा में नौकरी कर रहे बेटे की जानकारी भी हासिल कर ली और धमकी दी कि अगर किसी को कुछ बताया तो बेटे को नुकसान पहुंचाया जाएगा।
नकली कोर्ट, जज और वकील—28 दिन का डिजिटल अरेस्ट
आरोपियों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर नकली कोर्ट रूम, जज, वकील और गवाहों का पूरा सेटअप दिखाया। फरियादी को लगातार कहा गया कि कॉल कटते ही पुलिस उनके घर पहुंच जाएगी।
इस तरह 15 नवंबर से 12 दिसंबर तक 28 दिनों तक फरियादी को डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनके खातों से 1.34 करोड़ रुपये निकलवा लिए गए।
बेटे के आने पर टूटा डर का जाल
बैंक खातों से लगातार हो रहे ट्रांजेक्शन की जानकारी बेटे को मिल रही थी। जब वह स्वयं रतलाम पहुंचा, तब जाकर पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। उसी रात बेटे ने ई-एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद रतलाम पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।
चार राज्यों से गिरफ्तारी, अंतरराज्यीय नेटवर्क बेनकाब
एसपी के अनुसार एएसपी राकेश खाखा और सीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई। जांच में अब तक जबलपुर से 3 आरोपी व एक नाबालिग,नीमच से 1 आरोपी,गोरखपुर से 1 आरोपी,जामनगर (गुजरात) से 4 आरोपी,बिहार से 2 आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। कुल 11 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।
क्रिप्टो करेंसी से कंबोडिया तक पहुंचा पैसा
जांच में सामने आया कि फर्जी सिम, टेलीग्राम-व्हाट्सएप नेटवर्क, एपीके एप और सूरत के आंगड़िया सिस्टम के जरिए पैसा क्रिप्टो करेंसी में बदला गया और कंबोडिया तक पहुंचाया गया।
अब तक 11.40 लाख रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं, जबकि शेष राशि निकाली जा चुकी है।
केंद्रीय एजेंसियां भी सतर्क
मामले के तार कश्मीर, गुजरात, असम, बिहार और विदेशों तक जुड़े हैं। ऐसे में केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ समन्वय कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
पुलिस की अपील
एसपी अमित कुमार ने आम जनता से अपील की है कि कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी फोन पर अरेस्ट नहीं करती। ऐसे किसी भी कॉल से डरें नहीं, तुरंत अपने परिजनों और पुलिस को सूचना दें।
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